
कहते हैं एक व्यक्ति एक समय में एक ही क्षेत्र में महारत हासिल कर सकता है, लेकिन रामकोला कस्बे ने इस धारणा को गलत साबित किया है। यहाँ के लाल डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि सेवा का जज्बा हो तो एक साथ दो अलग-अलग क्षेत्रों में भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। डॉ. शर्मा न सिर्फ माँ गीतांजलि हॉस्पिटल के संस्थापक हैं, बल्कि क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय समाचार माध्यम रामकोला टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ भी हैं।स्वास्थ्य सेवा से शुरू हुआ सफरडॉ. अरविन्द कुमार शर्मा का जन्म एक सामान्य किसान परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्होंने रामकोला और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को करीब से देखा। गरीब मरीजों को छोटे से इलाज के लिए पडरौना, देवरिया या गोरखपुर जाना पड़ता था, कई बार रास्ते में ही उनकी हालत बिगड़ जाती थी।इसी पीड़ा को दूर करने के लिए डॉ. शर्मा ने माँ गीतांजलि हॉस्पिटल की स्थापना की। उनका उद्देश्य साफ था – “रामकोला के लोगों को रामकोला में ही सस्ता, सुलभ और बेहतर इलाज मिले।” अस्पताल में उन्होंने सामान्य चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, स्त्री रोग, बाल रोग और सर्जरी जैसी जरूरी सुविधाएं शुरू कराईं। अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत है डॉ. शर्मा की मानवीय सोच। वे अक्सर कहते हैं – “अस्पताल मेरे लिए व्यापार नहीं, माँ के नाम पर शुरू की गई एक सेवा है।” यही कारण है कि कई असहाय और गरीब मरीजों का यहाँ रियायती दरों और कई बार निःशुल्क इलाज भी किया जाता है। 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराकर उन्होंने हजारों परिवारों का विश्वास जीता है।कलम के सिपाही के रूप में दूसरी पारीस्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा ने समाज की एक और बड़ी कमी को महसूस किया – स्थानीय आवाज का मंच। राष्ट्रीय मीडिया में रामकोला, सोहरौना, कप्तानगंज जैसे कस्बों की समस्याएं कभी जगह नहीं पाती थीं।इसी को आवाज देने के लिए उन्होंने रामकोला टाइम्स की शुरुआत की। आज रामकोला टाइम्स सिर्फ एक अखबार या फेसबुक पेज नहीं, बल्कि रामकोला की जनता की आवाज बन चुका है। सड़क, नाली, खाद, गन्ना भुगतान, स्वास्थ्य केंद्रों की हकीकत या प्रशासन की अनदेखी – हर मुद्दे को डॉ. शर्मा के नेतृत्व में रामकोला टाइम्स ने बेबाकी से उठाया है।एडिटर-इन-चीफ के तौर पर उनकी पत्रकारिता का सिद्धांत है – “निष्पक्ष, निर्भीक और तथ्यपरक पत्रकारिता।” वे युवा पत्रकारों को हमेशा सिखाते हैं कि खबर में गति से ज्यादा सत्यता महत्वपूर्ण है।व्यक्तित्व – सादगी और दृढ़ता का संगमनीले सूट, चश्मा और सौम्य मुस्कान वाले डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा से जो भी मिलता है, वह उनकी सादगी का कायल हो जाता है। अस्पताल में वे मरीजों से डॉक्टर की तरह नहीं, परिवार के सदस्य की तरह मिलते हैं। न्यूज़ रूम में वे बॉस की तरह नहीं, बड़े भाई की तरह रिपोर्टरों का मार्गदर्शन करते हैं।स्थानीय समाजसेवी बताते हैं कि डॉ. शर्मा का जीवन दो मंत्रों पर टिका है – एक, शरीर की सेवा और दूसरा, समाज की सच्चाई की सेवा।भविष्य के बारे में पूछने पर डॉ. शर्मा कहते हैं, “मेरा सपना है कि माँ गीतांजलि हॉस्पिटल में जल्द ही ब्लड बैंक और आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की सुविधा शुरू हो, ताकि किसी भी इमरजेंसी में मरीज को बाहर न जाना पड़े। वहीं रामकोला टाइम्स को हम डिजिटल रूप से इतना मजबूत बनाना चाहते हैं कि रामकोला की हर छोटी-बड़ी खबर देश के कोने-कोने तक पहुंचे।”निश्चित तौर पर डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा जैसे लोग ही छोटे कस्बों को बड़ा बनाते हैं
